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आज के बच्चे ही कल के भविष्य होते हैं। अतः उनके बौद्धिक विकास की ओर ध्यान देना, हमारा सर्वप्रथम कर्तव्य है। जीवन की प्रारंभिक अवस्था, बचपन में बालक/बालिका भाषा को सीखने, बोलने, पढ़ने व लिखने के लिए काफ़ी उत्सुक दिखाई पड़ते हैं। उनकी इस उत्सुकता को बनाए रखते हुए उन्हें धीरे-धीरे भाषा ज्ञान की ओर मोड़ना एवं सामान्य ज्ञान से जोड़ना, पाठ्य-पुस्तकों द्वारा ही संभव है। श्रेष्ठ पुस्तकें ही उनमें श्रेष्ठ नागरिकता की नींव रखने का सामर्थ्य रखती हैं।

आपके समक्ष रचिता शिखर पाठमाला श्रृंखला 1-8 प्रस्तुत करते हुए हमें प्रसन्नता के साथ गर्व की भी अनुभूति हो रही है, क्योंकि इसे NEP 2020 के आधार पर तैयार किया गया है। ' रचिता शिखर पाठमाला' की कुछ खास विशेषताएँ-

मौखिक, लिखित एवं चित्र सामग्री की सहायता से बच्चों को उनके आसपास की चीजों से परिचित कराया गया है।

घर-परिवार, मित्र-संबंधियों में बोली जाने वाली हिंदी भाषा का मानक रूप अपनाते हुए, बच्चों के विचार एवं प्रस्तुति में दृढ़ता लाने का भरपूर प्रयास किया गया है।

कहानियों एवं कविताओं के माध्यम से पाठन में उत्साह बनाए रखते हुए नए-नए शब्दों एवं उनके अर्थों से परिचित कराया गया है।

पठन-सामग्री तथा अन्य क्रिया-कलापों द्वारा शिष्टाचार, ईमानदारी, संवेदनशीलता, परोपकारिता तथा सच्चाई जैसे नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया गया है।

रचनात्मक कौशल' द्वारा बच्चों को उनके आस-पास की चीजों से जोड़कर स्वयं कुछ करने के लिए प्रेरित किया गया है। साथ ही पर्यावरण सुरक्षा, कला-संस्कृति, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी उद्देश्यों की ओर भी खास ध्यान दिया गया है।

'वाचन कौशल' को सम्मिलित कर परस्पर बातचीत, घटना-वर्णन, भाषण और कविता-पाठ जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया है।

इसके अतिरिक्त 'खेल-खेल में' एक ऐसा अनुभाग है जिसे सम्मिलित कर विद्यार्थियों को उनके बौद्धिक स्तर के अनुसार, अनेक गतिविधियों से जोड़ा गया है जिससे 'शिक्षा एवं शिक्षार्थी' संबंधी प्रत्येक उद्देश्य की पूर्ति की जा सके।

आशा है कि ' रचिता शिखर पाठमाला श्रंखला' 1-8 छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। पुस्तक को और अधिक उपयोगी एवं समृद्ध बनाने के लिए शिक्षाविदों तथा विद्वानों के सुझाव आमंत्रित हैं।